चाची को मिल बाँट के चोदा

मेरा नाम रमण हे और मेरे दोस्त का नाम प्रेम हे. हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त हे. हमारी उम्र २३ साल हे और हम दोनों दिखने में बहोत ही हेंडसम हे.

मुझे अपने दोस्त की एक बात बड़ी गन्दी लगती हे. की वो बहोत डरपोक हे और हम काम को करने से पहले ही डर के मारे मना कर देता हे या फिर भाग जाता हे.

ये कहानी तब की हे हम हम प्रेम की रिश्तेदारी में हो रही शादी को अटेंड करने गए थे. शादी चंडीगढ़ में थी और हम एकदम रेडी होकर शादी अटेंड करने गए थे. शादी लड़की की थी और हम वहाँ बहुत बोर हो रहे थे क्यूंकि अभी बारात भी नहीं आई थी.

मैं वहाँ चेयर पर बेठा स्नेक्स खा रहा था की तभी प्रेम मेरे पास आया और बोला, यार रमण वो जो सामने पिंक साडी में सेक्सी लेडी गोलगप्पे खा रही हे वो मेरी चाची हे.

मैं: तो क्या?

प्रेम: तो क्या यार जब भी वो मेरे सामने आती हे तो मेरा तो खुद से ही कण्ट्रोल उठ जाता हे और मेरा लंड सलामी देने लग जाता हे.

मैं: साले तेरी चाची हे वो!

प्रेम: तो क्या हुआ यार, आजकल कोनसा रिश्ता सगा हे सब एक दो जगह तो मुह मरते ही हे.

चाची भी सच में सेक्सी लग रही थी. उसके होंठो पर रेड लिपस्टिक थी. उसके बूब्स मेंगो के जैसे बड़े बड़े थे. और उसकी गांड स्पोंजी सी थी जिसे दबाते ही अन्दर का लंड बवाल मचा दे! उसकीचाची को देख के मेरा लंड भी खड़ा हो रहा था.

तभी प्रेम को किसी ने बुला लिया और मैं उसकी चाची पर निगाहें थमाए बैठा था और उसकी फिगर को देख रहा था. और मैं सपनो की कहानी में उसे चुदाई के लिए रेडी कर रहा था. सच में कमाल की आइटम थी मेरे दोस्त प्रेम की चाची!

वैसे मै आप को बता दूँ की शादी में आते ही म्रेरी नजर भी उसकी चाची पर पड़ गई थी. पर अब तो बिना कुछ खाए पिए उसे ही देख रहा था में. मैं सोचने लग गया की चाची अब भी इतनी सेक्सी हे तो जवानी में कितने लंड उसके लिए मचल गए होंगे और कितने उसने लिए होंगे!

कुछ देर के बाद प्रेम भी वापस आ गया!

प्रेम: आया कुछ आइडिया दिमाग में यार?

मैं: नहीं यार!

प्रेम: सोच साले सोच अगर पट गई तो मजे ही मजे हे दोनों को!

मैंने फिर मजाक में कहा, साले चाची हे तेरी.

हम मजाक मजाक में चाची का फिगर डिसकस करने लगे. और साथ में हम दोनों उसे चोदने के सपने भी देख रहे थे.

वहाँ पर शादी में बहुत सब जवान लड़कियां भी थी और वो लड़कियों में से बहुत सब हमें क्लीन लाइन भी दे रही थी. पर हमें तो चाची की चूत का हलवा ही खाना था. और इसलिए हमारी नजर कही और गई ही नहीं!

प्रेम की चाची का नाम वैसे अनिका हे और वो दिखने में एकदम गोरी हे. उनकी उम्र ३५ साल हे और उनकी हाईट ५ फिट ६ इंच हे. और उसका फिगर तो मैंने आप को बोला वैसे एकदम धांसू ही हे.

अब प्रेम मुझे चाची के पास ले गया और चाची से पहचान करवाई मेरी. मैंने भी चाची को हल्लो बोला तो चाची ने मुझे अपने सिने से लगाकर मेरे हल्लो का जवाब दिया. मैं समझ गया था की चाची भी पहुंची हुई चीज हे. उनके ३ बच्चे हे. चाचा जी बाहर रहते हे और वो ४ साल से ही बहार हे और चाची से मिलने ४ साल में सिर्फ एक बार ही आये थे.

मैं समझ गया की चाची की चूत भी चुदने के लिए प्यासी हो सकती हे. पर डर ये हे की कही चाची ने किसी और को अपनी चूत के लिए पहले ही फंसा के न रखा हो!

अब मैंने चाची को पटाने में लग गया. चाची भी बहुत चालाक थी. फिर भी मैं उनके सामने तारीफ़ के पुल बांधते गया और उन्हें ये महसूस कराने लग गया की मुझसे भी ज्यादा प्रेम आप का दीवाना हे.

चाची मेरी बातों को सुनते रही और मन ही मन खुश भी हो रही थी. मैं भी समझ गया की चाची मेरी बातों का मजा ले रही हे. मैंने बातो ही बातों में कह दिया की चाची आप के सपने तो हर जवान लड़का देखता हे!चाची (स्माइल के साथ): क्या तुम भी?

मामला पूरा वैसा ही था जैसे मैं चाहता था. पर मैंने तो चाची को प्रेम के लिए पटाना था!

मैं: चाची प्रेम तो आप का दीवाना बना घूमता हे. उसको तो रात में भी आपके ही सपने आते हे. वो तो आप को बिना देखे खाना भी नहीं खा रहा था.

मैं उनको ये सब कहते हुए देखता रहा. चाची की आँखों में भी एक अजीब सा नशा था.

इतने में प्रेम भी हमारे पास आ गया और चाची ने बोला: प्रेम जरा इधर तो आना.

प्रेम चाची की बात मानते हुए उनके साथ थोडा आगे को हो गया और तब चाची ने कहा की मुझे कपडे चेंज करने जाना हे.

प्रेम: चाची मेरे पास तो कार नहीं हे. चाची: प्लीज किसी की भी अरेंज कर लो.

प्रेम ने मेरी तरफ देखा तो मैंने आँख मार दी.

प्रेम ने मेरी तरफ देख के कहा: रमण तुम ही ले चलो न तुम्हारी कार में!

मैंने भी बिना देरी किये हां कर दी और अपनी कार निकाल ली. चची मेरी साथ वाली सिट पर बैठी थी और प्रेम पीछे की सिट पर था. चाची कुछ परेशान सी लग रही थी. वो रस्ते में चुपचाप ही बैठी रही. और न ही प्रेम कुछ बोला. मैंने चाची को परेशान देखकर उनके उसकी परेशानी का कारन पूछा. चाची कुछ नहीं बोली इतने में चाची का घर भी आ गया.

चाची और प्रेम कार से उतर कर घर की अन्दर चले गए और मैं भी कार साइड में लगाकर अन्दर चला गया. जैसे ही मैं अन्दर गया मैंने देखा प्रेम दरवाजे पर खड़ा होकर दरवाजे के छेद से अन्दर देख रहा हे. मैं भी प्रेम के पास गया और छेद में से देखने लगा. अन्दर कमरे में चाची कपडे चेंज कर रही थी.

तभी मेरे माइंड में एक आइडिया आया और मैंने अपना आइडिया प्रेम को बताया को मौका सही हे जा अन्दर चला जा और जकड़ के चाची को अपनी बाहों में. पर प्रेम को तो बहुत डर लग रहा था ये सब करने में.

मैंने उसके डर भगाने के लिए उसके चुत्त्ड पर एक जोर से थप्पड़ मारा और उसे गुस्से से भरी आँखे दिखाने लगा. अब वो डर कर धीरे से दरवाजे के अन्दर चला गया और चाची को पीछे से पकड़ के उसके बूब्स दबाने लगा. चाची ने जोरदार चीख मारी और खुद को प्रेम के हाथो से निकालने की कोशिश करने लगी. पर चाची के चहरे पर गुस्से के साथ साथ प्यार भरी स्माइल भी थी.

चाची: प्रेम मुझे छोड़ दो प्लीज.

चाची गुस्से के साथ साथ प्रेम की छेड़खानी का मजा भी ले रही थी.

प्रेम चाची के बूब्स को जोर जोर से दबाने लगा. और उन्हें पीछे से ही जप्पी पाए खड़ा था. फिर उसने चाची की ब्रा उतार दी जो की वो पहले ही उतारनेवाली थी. और अब प्रेम जोर जोर से निपल्स को मसलने लगा. साथ में प्रेम चाची की गर्दन पर किस कर रहा था. चाची भी मदहोश होने लग गई और मदहोशी में ही वो बोली: छोड़ दो प्रेम वरना रमण आ जाएगा!

प्रेम: चाची वो नहीं आएगा क्यूंकि उसने ही मुझे भेजा हे ये सब करने के लिए!

चाची मेरी ये बात सुनते ही हेरान हो गई और मुझे देखने लग गई. मैं भी उनकी आँखो में आँखे डालकर देखने लगा. इधर प्रेम का हाथ चाची के बदन से पेटीकोट में उतरने लगा था. चाची ने भी अब खुद को बचाना छोड़ दिया था.

अब चाची मेरे सामने सिर्फ पेंटी में थी. उनकी मेंगो जैसी चूचियां और पिंक पेंटी से ढंकी हुई छुट और गांड क्या लग रही थी. उनको ऐसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

ये सब मैं दूर खड़ा देख रहा था और अब चाची ने मुझे अपने पास बुला लिया. चाची ने प्रेम के पास जा के उसके होंठो पर चूम लिया. चाची ने पेंट पर हाथ रख कर लंड को ऊपर से ही सहला दिया.

उनको ऐसा करते हुए देख मेरी हालत भी खरं हो रही थी लंड भी बहोत पागल हो रहा था पर मैं उनके बिच कबाब में हड्डी नहीं बनना चाहता था इसलिए मैं वही से उनको देखकर मजे लेता रहा.

मैंने अब देखा की चाची भी प्रेम के कपडे उतार रही थी और लंड को अपने हाथ में पकड कर उसे मसल रही थी. अब दोनों एक दुसरे के आगे एकदम नंगे थे.

प्रेमे ने उन्हें गोदी में उठाया और बेड पर लेटा दिया. और अब वो उन्हें किस करने लगा और उनके बूब्स को मुह में डाल के दूध पिने लगा चाची का.

चाची भी अब जोर जोर से सिसकिय ले रही थी. अब प्रेम चाची की छाती पर बैठ कर अपना खड़ा लंड उनके मुह पर फेरने लग गया. इसका मजा चाची भी उठा रही थी. प्रेम ने लंड को चाची के लिप्स पर रख कर अन्दर डालने की कोशिश की. पर वो अन्दर लेने से मना कर रही थी.

प्रेम ने बहुत कहा लेकिन चाची लंड चूसने को नहीं मानी. तब प्रेम ने चाची की टांगो को खोल कर उनकी चूत पर अपना मुहं लगा दिया और चूत को एकदम चाटने लगा. चूत बहुत ही मुलायम थी और चिकनी भी थी. प्रेम ने अपनी जुबान चूत के छेद में डाल दी और उसे अन्दर बहार करने लगा.

चाची भी इसका बहोत मजा लेरही थी और जोर जोर से आह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ह्म्म्मम्म करती जा रही थी.

प्रेम चूत को चाटता ही गया और चाची भी अपनी गांड उठा उठा कर अपनी चूत को मुह के ऊपर घिस रही थी. वो चुत के धक्के प्रेम के मुह में मार रही थी. प्रेम का लंड अब चाची की चूत को चोदने को उत्सुक था. प्रेम चाची की टांगो के बिच से उठा और चाची के ऊपर आकर चूत पर अपना लंड सेट कर दिया. चाची ने कहा: धीरे से डालना प्रेम, ४ साल से कोई अन्दर नहीं गया हे इसलिए टाईट हो गई हे पूरी.

प्रेम ने चाची की चूत पर अपना लंड रखकर २ धक्के लगाए. चाची की चूत में उसका ७५% लंड समां गया था. चाची जोर जोर से आह्ह आहाह्ह्ह आह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह अहाआआअ कर रही थी. उसकी आवाजे सुनकर अब मुझसे खुद पर कंट्रोल नहीं हुआ.

मैंने भी अपनी पेंट उतारी और अपने खड़े लंड को हाथ में लेकर प्रेम की चाची के मुह पर रख दिया. मेरा लंड प्रेम के लंड से मोटा और लम्बा था. जैसे ही चाची ने आँखे खोली तो वो हेरान हो गई मेरा लंड देख के. वो कुछ कहने के लिए जैसे ही अपना मुह खोली मैंने अपना लंड गले में उतार दिया! वो चुप रही और मेरे लंड को अजीब सी शान्ति मिली!

तभी चाची ने अपना हाथ ऊपर किया और मेरे लंड को मुह से निकाल कर होंठो में पकड़ लिया. चाची मुझे गुस्से से देखने लग गई. पर मैंने भी उन्हें मानते हुए उनका गुस्सा शांत कर दिया. इधर प्रेम उनकी चुदाई करता जा रहा था जिस से चाची का गुस्सा एक मिनट में भाग गया और मैंने भी अपना लंड चाची के लिप्स पर रख दिया जिस से चाची ने अपना मुह खोलते हुए अन्दर ले लिया और उसे चूसने लगी.

तभी प्रेम बोला: साली मेरा लंड लेने में तो तेरी गांड फट रही थी और अब रमण का लंड लेने में कुछ नहीं हो रहा हे तुझे. कैसे रंडी की तरह चूस रही हे मेरे दोस्त का लंड तू, बड़ा लंड चाहिए था तुझे रंडी!

चाची: चोद मुझे चोद, आज तुझे मेरी चूत रमण की वजह से ही मिली हे. तू चुपचाप इसे चोद और अपने माल को इसके अन्दर निकाल दे. आह्ह्हह्ह आह्ह्हह्ह करते हुए वोबोली, जोर से मार अपना लोडा मेरी बुर के अन्दर.

तभी चाची का शरीर अकड़ने लग गया और प्रेम ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और कुछ ही पल में दोनों का पानी निकल गया. वो दोनों ही थक कर लेट गए. पर मेरा लंड तो अभी भी प्यासा था इसलिए मैंने चाची को थोडा होश में आने का इंतजार किया और प्रेम की चाची होश में आई तो उनके लिप्स पर सीधे लंड को रख दिया जिसे चाची ने एकदम से मुहं में ले लिया और चूसने लगी. मैं उनके बूब्स दबाने लगा जिस से चाची की चूत फिर से गरम होने लगी.

चाची ने प्रेम का मुह अपनी टांगो में फंसा कर अपनी चूत चाटने को कहा. प्रेम थक चूका था पर वो फिर भी धीरे धीरे से चूत को साफ़ करने लगा. इधर मैं अपना लंड चाची के गले में उतारे जा रहा था और मेरा लंड उनके गले में जाकर पागल सा हो गया था.

अब प्रेम का लंड फिर से खड़ा हो गया था. और चाची भी चुदने के लिए तैयार थी. पर अब प्रेम चाची का मुह चोदना चाहता था और मैं उनकी चूत को. तो मैं उनकी चूत पर लंड सेट कर के बैठ गया. और एक जोर के धक्के से मैंने लंड चाची की चूत में धकेल दिया. चाची जोर जोर से चीख रही थी.

३ झटको में मेरा लंड चाची की चूत में पूरा समा गया. चाची की बचेदानी से लंड टकरा कर उसे मजे दे रहा था.. इधर प्रेम ने भी अपना लंड चाची के मुह में डालकर उसके मुह की चुदाई चालु कर दी और वो भी फुल मजे ले रहा था.

अब मैंने चाची को अपने ऊपर किया और खुद निचे आ गया. चाची मेरे लंड पर उछल उछल कर अपनी चूत चुदवा रही थी. और प्रेम भी उनका मुह जोर से चोद रहा था. हम तीनो चुदा का मजा फुल ले रहे थे और पुरे कमरे में बस चुदाई की फच फच ही गूंज रही थी.

अब मैंने चाची को घोड़ी बनाया और उनकी चूत में लंड डाल कर उनके ऊपर चढ़ गया और जोर जोर से कुत्तो की तरह चुदाई करने लगा.

चाची एक बार बिच में अपना पानी निकाल चुकी थी. और कुतिया बन के उनका सेकंड टाइम भी हो गया. तभी मैंने चाची की चूत को जोर जोर से मारी. उतने में प्रेम का हो गया. उसने चाची के मुह से लंड को निकाल के उसे हिलाया. चाची के सामने ही प्रेम के लंड की पिचकारी निकल पड़ी. मेरा भी होने को था. मैंने चाची की सेक्सी चूत से लंड निकाला. और मैंने बहार न निकालते हुए लंड को चाची के मुहं में पेल दिया. चाची ने किस किया लंड को और एक हाथ से बस थोडा हिलाया. मेरे लंड का पानी निकल के चाची के मुहं को भरने लगा.

हमारी चुदाई करने का मूड और भी था लेकिन शादी भी अटेंड करनी थी. हम सब बाथरूम में घुसे और फ्रेश हो गए. हम लोग शादी में पहुँच गए और उस दिन के बाद चाची की चुदाई का चस्का ऐसा पड़ा की हम दोनों चाची को मौका मिलते ही अपने निचे लेकर खूब चोदते हे.

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